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तुंगनाथ महादेव (उत्तराखण्ड)

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  विश्व का सबसे ऊँचा शिव मन्दिर तृतीय केदार तुंगनाथ महादेव   बाबा तुंगनाथ मन्दिर    तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। यह पंच केदार मंदिरों में से एक है और विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर माना जाता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 3,680 मीटर (12,073 फीट) है। यह मंदिर चोपता से लगभग 4 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पर स्थित है और इसे महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। ट्रेकिंग वे  तुंगनाथ मंदिर का पौराणिक महत्व तुंगनाथ मंदिर का संबंध महाभारत के पांडवों से है। कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लेने गए, लेकिन शिव उनसे नाराज़ होकर गुप्तकाशी चले गए। वहां से शिव ने बैल का रूप धारण किया और विभिन्न भागों में प्रकट हुए। जिन स्थानों पर उनके शरीर के अंग प्रकट हुए, वे पंच केदार के नाम से प्रसिद्ध हुए। तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजाएं प्रकट हुई थीं। तुंगनाथ मंदिर की विशेषताएँ ऊँचाई: 3,680 मीटर (12,073 फीट) शैली: उत्तर भारतीय नागर शैली मंदिर का निर्माण: माना जाता है कि इसे अर्जुन न...

मेघों का प्रदेश मेघालय

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Police Bazar Shillong  भारत राज्य के पूर्वी हिस्से में 7 बहने कहे जाने वाली राज्य में से एक मेघालय , इसे मेघों ( बदलो) का गृह भी कहा जाता है। इस प्रदेश में आपको घूमने को बहुत सी जगह मिलेंगे जिनमे से आप प्रमुख तौर पे चेरापूंजी, मौलिंगनोंग, दावकी, मोसिनराम, मोसमाई cave, डबल डेकर रूट ब्रिज, व सेवेन सिस्टर वॉटर फॉल तथा बहुत सी मनमोहक जगह घूमने को मिलेगा। ❤️❤️❤️ इस प्रदेश की राजधानी शिलांग है जो बेहद खूबसूरत और शांति सन्देश से भरा हुआ है, इस प्रदेश का दूसरा छोर बांग्लादेश को छूता है,जो की दावकी गांव के उम्मोनगोट नदी पर भारत बांग्लादेश के सीमा को बांटती है। एक तरफ जहां यह प्रदेश स्वच्छता का संदेश देता है वही Asia's Cleanet Village मोलिंगनोंग, यह एशिया का सबसे क्लीन गॉव है, यहां आपको प्रकृति की सुंदर ऐसी देखने को मिलेगी मानो साक्षात यहां भगवान का वास हो। Elephant Fall दूसरी ओर यहां के प्रकृति को आपके कल्चर के साथ जोड़े रहता है। उम्मोनगोट नदी ( दावकी )   जी, ये वही नदी है से हम क्रिस्टल क्लियर रिवर कहते है, यहां प्रकृति की खूबसूरती और मानो की उसका दिल यहां ही बसा हो। इस जगह पर आने क...

मां कामाख्या देवी - असम

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  51 शक्तिपीठों में से एक  कामाख्या शक्तिपीठ  बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है।   कामाख्या रेलवे स्टेशन   मेरे सभी पाठको को मेरा प्रणाम। मैं निलेश रिशु मेरे ब्लॉग सफरनामा में आपका स्वागत करता हु,इस ब्लॉग में मैं आपको भारत के पूर्वी भाग में असम राज्य के गुवाहाटी स्थित 51 शक्तिपीठ में से एक मां कामाख्या देवी की जानकारी दूंगा | मां कामाख्या के दर्शन के लिए हम निकले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन से,हमारी यात्रा कुल 25 घण्टों में पूरी हुई, जहा हम गोरखपुर से चल कर देवरिया होते हुए बिहार के छपरा, हाजीपुर,नौगछिया,कटिहार व किशनगंज होते हम पहुंचे पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी तथा यहां से होते हुए असम राज्य के गुवाहाटी स्थित कामाख्या रेलवे स्टेशन पर पहुंचे और वहां एक रात बिताने के बाद अगली सुबह हम शक्तिपीठ मंदिर मां कामाख्या देवी का दर्शन करने चल पड़े, वहां पहुंच देखा कि हजारों भक्तों की लाइन लगी पड़ी है जो तकरीबन 7 - 8 घंटे तक के इंतजार के बाद माता के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता परंतु ऐसा नहीं हुआ हम वहां स्पेशल टिकट लेकर एक अलग लाइन में लग गए, स्पे...

हरिद्वार का इतिहास

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मित्र अन्नू के संग हर की पौड़ी पर   यह  देवभूमि उत्तराखंड   हैं : प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का धरोहर जो उत्तराखंड में अपनी एक विशेष पहचान बनाए हुए हैं  " हरिद्वार " -  जिसे  " गेटवे ऑफ़ गोड्स "  भी कहा जाता है। आप सभी को मेरा प्रणाम, हाल ही में मैं हरिद्वार की यात्रा किया जहा अपने यात्रा का वर्णन मैं इस लेख के माध्यम से कर रहा उम्मीद है आपको अच्छा लगेगा। इसका एक विस्तृत इतिहास है। हरिद्वार भारत के उत्तर में शिवालिक श्रेणी के विल्ब व नील पर्वतों के बीच गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है । आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तराखंड का महत्वपूर्ण जिला है हरिद्वार । हरिद्वार का इतिहास हरिद्वार का इतिहास बरसों पुराना नहीं है बल्कि युगों-युगों पुराना है। यहां ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षो तपस्या की है। और इस धाम को पवित्र स्थल के रूप में निर्माण किया है। यहां गंगोत्री हिमनद से निकलकर पवित्र नदी गंगा बहती है जिसका उद्गम स्थल  गोमुख  है । पौराणिक काल में हरिद्वार को अनेक नामों से जाना जाता था। जैसे- गंगा द्वार , स्वर्ग द्वार , हरद्वार,  हरिद्व...

आओ देखे व समझें उत्तराखंड के कुछ जगहों के बारे में .....

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ये फोटू मसूरी की है..  ( वैसे तो मोबाइल पिक है, पर फोटू, फुल फ्रेम में देखिएगा, .. मजा आ जाएगा )      देहरादून से धनौल्टी की ओर जाने वाली इस सड़क पर, जब  मसूरी के पीछे वाले हिस्से में पहुँचते हैं, और किस्मत अच्छी एवं जाड़े का खुला आसमान हो, तो ऐसा दृश्य सामने होता है, वरना यहाँ से तकरीबन 250 किलोमीटर दूर फैली हिमालय की इस श्रृंखला और यहाँ के बीच धुंध का एक परदा होता है, साल के 350 दिन।       असल में पुरानी मसूरी इसी पार थी, जिसे लैन्डौर के नाम से जानते हैं, जहाँ अभी भी लेखक रस्किन बाँड और स्टीवन आल्टर जैसे लोग बचे हुए हैं। टाम आल्टर भी लैन्डौर में ही रहते थे। ये अंग्रेज साहबों का रिहायशी इलाका था, और वर्तमान मसूरी जो माल रोड के इर्द गिर्द बसी है, वो असल में  बाजार था।                समझिए, मसूरी की खूबसूरती यहाँ घूमने आनेवाले लोगोंं के हिस्से में शायद ही आ पाती है, क्योंकि असली मसूरी तो पहाड़ के दूसरी ओर है जहाँ देवदार, बाँज और चीड़ के मिश्रित जंगल, गहरी बहती पानी की धाराएँ, अभी भी थोडे बहुत जंगली जीव जै...

नीतीश सिंह ने 5819 मीटर ऊंची चोटी माउंट रुदुगैरा किया फतह

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  N itish Sing h reached at Mt.RuduGaira Nitish Singh at Mt.Rudugaira (19091 ) Nitish Singh from Gorakhpur Complete his Trekk at Mt.RuduGaira in 8 Oct.2020, it is very Glad full News. Mount Rudugaira is located in the Rudu Valley inside the Garhwal Himalayas. The Rudu Valley offers an approach for the peaks in the Gangotri Massif as well as for Auden’s Col. Mount Rudugaira Expedition is a good introduction to mountaineering for experienced trekkers who have previous high altitude trekking experience and who wish to take the next step-up in adventure activities. Factual Information: Name: Mount Rudugaira Height: 5819 m (19091 feet) Location: Rudu Valley, Garhwal Himalayas, Uttarakhand, India Difficulty: Moderate (Mountaineering Expedition) Nitish Singh With team Pricing Exclusions: Travel from and to city of origin to Dehradun. Meals during onward and return journey from city of origin to Dehradun. Stay in Dehradun before and after expedition. Extra meals ordered/a-la-carte order...

Sikkim Gangtok Tour Experience

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घू मो सिक्कि म नाथुला पास - छांगू लेक बहुत लोगो को घूमने का शौक होता है, जो चाहते है कि अपनी जिंदगी में वह सारे हसीन पल देखे व महसूस करे जो धरती पर ही स्वर्ग जैसा है । आप सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार मैं निलेश रिशु पाण्डेय कुशीनगर उत्तर प्रदेश का रहने वाला हु । घूमने का शौक मुझे भी बहुत है मैं भी चाहता हु देश की सभी जगहों पर जाऊ ,। अब तक मैं नेपाल सहित भारत के 5-6 राज्यो में घूम चूका हूँ । दोस्तों  वर्ष 2019 में मै  सिक्किम (Sikkim) राज्य के गंगटोक(Gangtok) शहर गया था । क्या बताऊँ वाकई में भारत जन्नत कही जाने वाली जगहों मे से सिक्किम भी एक बेहद खूबसूरत जगह है, । बहुत ही साफ- सुथरी, व पॉल्युशन फ्री सिटी है । वहा के लोग बहुत ही व्यावहारिक व नेक है । M G Mark et - Ga ngto k N igh t W al k मेरा 6 दिन का ट्रिप था सिक्किम (Sikkim) का मै अपने दोस्तों के साथ पहले दिन शाम को होटल में पंहुचा , वहाँ हमने होटल पहले से बुक कर रखा था, हम लोग रात होटल में आराम किये फिर, अगली सुबह लोकल साइट सीइंग करने गए , जहा हम लोग नामनम व्यू पॉइंट नाम की जगह पर गये फिर वहा से रोप-वे का मजा लिय...